Gayatri Pariwar Sri Ganganagar|Gayatri Shakti Peeth Sri Ganganagar|Shakti Peeth Sri Ganganagar

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गायत्री परिवार, श्री गंगानगर में आपका स्‍वागत है -

  1. गायत्री परिवार - श्रीगंगानगर अखिल विश्‍व गायत्री परिवार आंदोलन का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसकी स्‍थापना गुरूदेव पं श्री राम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा की प्ररेणा से 1987 में की गई। गायत्री परिवार की युग निमार्ण योजना एक आध्यात्मिक आंदोलन है जिसका उद्देश्‍य दुनिया भर में उच्चतम मानवीय मूल्यों को पुन: स्‍थापित करना है।
  2. गायत्री माता को देव माता, वेद माता और विश्व माता के रूप में भी जाना जाता है गायत्री सर्वशक्तिमान नियंत्रित सृजन, संरक्षण, और ब्रह्मांड के सभी चेतन और निर्जीव तत्वों के परिवर्तन की एक सर्वोच्च मौलिक और सर्वव्यापी शक्ति है। गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य का जन्‍म 10 सितंबर 1911 को आगरा के पास गांव आवंलखेडा में एक ब्राह्मण परिवार में को पैदा हुआ था. ऊनकी बचपन से ही आध्यात्मिक भक्ति और सामाजिक सेवा में बहुत रूचि थी। महान स्वतंत्रता सेनानी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय ने उन्‍हें यज्ञोपवीत एवं गायत्री मंत्र की दीक्षा दी और उन्‍हें गायत्री मंत्र में बारे में बताया। पंद्रह वर्ष की आयु में ऊनके आध्यात्मिक गुरु, एक महान हिमालय योगी सूक्ष्म रूप में पूजा के दौरान दिखाई दिया. उसके कहने पर उन्‍होंने चौबीस साल के लिए चौबीस लाख (2.4 मिलियन) बार गायत्री मंत्र पुश्‍चरण किये। उन्‍होंने उच्च सिद्धियों के लिए हिमालय में चार बार दौरा किया और उसी दौरान भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया।
सदवाक्‍य
  • ‘‘हम बदलेगें युग बदलेगा’’–‘‘हम सुधरेंगे युग सुधरेगा’’ इस तथ्‍य पर हमारा परिपूर्ण विश्‍वास है।
  • मनुष्‍य अपने भाग्‍य का निर्माता आप है – इस विश्‍वास के आधार पर हमारी मान्‍यता है कि हम उत्‍कट बनेंगे और दूसरों को श्रेष्‍ठ बनाएगे तो युग अवश्‍य बदलेगा।
  • जो कुछ बच्‍चों को सिखाते हैं, उन पर बड़े खुद अमल करें तो यह संसार स्‍वर्ग बन जाए।
  • मनुष्‍य का जन्‍म तो सहज होता है, पर मनुष्‍यता उसे कठिन प्रयत्‍न से प्राप्‍त करनी पडती है।
  • मनुष्‍य परिस्थितियों का दास नहीं वह उनका निर्माता, नियंत्रणकर्त्ता और स्‍वामी है।
  • आदमी काम की अधिकता से नही वरन् उसे भार समझकर अनियमित रूप से करने पर थकता है।


सूचनाएं

दैनिक कार्यक्रम

प्रात:कालीन आरती 5:30
ध्‍यान साधना प्रात: 7:00 से 7:30
दैनिक यज्ञ प्रात: 8 बजे
सायंकालीन आरती 5:30 से 6:00
मंदिर के कपाट दोपहर 12:00 से सांय 4:00 व रा‍त में 8:30 बजे से प्रात: 5 बजे तक बंद रहेंगे।
रविवार को साप्‍ताहिक पंचकुण्‍डीय यज्ञ प्रात: 9 बजे
यज्ञ करवाने हेतु तथा संस्‍कार करवाने हेतु कम से कम दो दिन पूर्व अवश्‍य सम्‍पर्क करें।